‘ऑपरेशन टाइगर’ पर ब्रेक? उद्धव ठाकरे के साथ सांसदों की अहम बैठक
मुंबई: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची सियासी हलचल और सांसदों के पाला बदलने की खबरों के बीच अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित बड़ी टूट के दावों के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने स्थिति को संभालने के लिए अपने सभी लोकसभा सांसदों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपात बैठक अपने बांद्रा स्थित 'मातोश्री' निवास पर बुलाई।
सांसदों की संभावित टूट और 'ऑपरेशन टाइगर' का खौफ
पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद पाला बदलकर महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। सत्तारूढ़ खेमे द्वारा इस संभावित दलबदल को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया गया था।
शिंदे गुट के कुछ मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया था कि अगले चार से पांच दिनों के भीतर ठाकरे गुट के 6 से 7 सांसद उनका साथ छोड़ देंगे। लोक सभा में उद्धव ठाकरे गुट के कुल 9 सांसद हैं; ऐसे में दलबदल कानून की कार्रवाई से बचने और किसी भी कानूनी विभाजन के लिए दो-तिहाई यानी कम से कम 6 सांसदों का एक साथ टूटना अनिवार्य है। इसी सियासी खतरे को भांपते हुए उद्धव ठाकरे ने तुरंत यह बैठक बुलाई।
सभी 9 सांसद हमारे साथ: हाइब्रिड मोड में हुई बैठक
इस बैठक के खत्म होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मीडिया के सामने आकर बड़ा दावा किया। राउत ने विरोधियों के 'ऑपरेशन टाइगर' के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सभी 9 लोकसभा सांसद पार्टी और उद्धव ठाकरे के साथ चट्टान की तरह मजबूती से खड़े हैं और पार्टी में किसी भी प्रकार की टूट की खबरें महज एक कोरी अफवाह हैं।
संजय राउत ने बैठक की आंतरिक जानकारी देते हुए बताया कि 'मातोश्री' में अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे, संजय दिना पाटिल और अरविंद सावंत व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे। बाकी के पांच सांसद (नागेश अष्टिकर, संजय जाधव, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमराजे निंबालकर) अपने निजी, पारिवारिक कारणों और निर्वाचन क्षेत्र में चल रहे विधान परिषद चुनाव के कारण मुंबई नहीं आ सके, लेकिन वे सभी ऑनलाइन (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) और फोन के माध्यम से इस बैठक में शामिल हुए। राउत ने कहा कि यह कोई आपात बैठक नहीं बल्कि एक नियमित संगठनात्मक बैठक थी और जो सांसद आज व्यक्तिगत रूप से नहीं आ पाए, वे अगले दो-तीन दिनों में खुद 'मातोश्री' आकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे।
दिल्ली के बड़े विधेयकों के गणित से जुड़ी हैं कयासबाजियां
महाराष्ट्र में अचानक बढ़ी इस सियासी हलचल के तार दिल्ली की बड़ी राजनीतिक रणनीतियों से जुड़े होने की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में हुई टूट के बाद केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) सरकार लोकसभा में 'महिला आरक्षण' और 'निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन (परिसीमन) विधेयक' को दोबारा संसद के पटल पर लाने की तैयारी कर रही है।
इन ऐतिहासिक और बड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार को संसद में दो-तिहाई विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी। इसी विधायी गणित को मजबूत करने के लिए एनडीए अपने कुनबे और सांसदों की संख्या बल को बढ़ाने के प्रयासों में जुटा है, जिसके कारण विपक्ष के सांसदों, खासकर शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को तोड़े जाने की अटकलों को हवा मिली है। फिलहाल, 'मातोश्री' की इस बैठक से उद्धव ठाकरे ने एकजुटता का संदेश देकर अपने विरोधियों के दावों को शांत करने की पुरजोर कोशिश की है।

दमिश्क हाईवे बना हादसे का शिकार, भीषण बस दुर्घटना में 35 की मौत
रालोद को बड़ा झटका, 10 पदाधिकारियों ने एक साथ छोड़ी पार्टी की जिम्मेदारी
सेबाश्रय शिविर घोटाले पर सियासत तेज, CM शुभेंदु ने 'धोखेबाज भतीजे' को ललकारा
CJP Protest पर BSP प्रमुख मायावती की दोटूक, कार्यकर्ताओं को दी सख्त हिदायत
FY26 रिजल्ट: PhonePe की रेवेन्यू बढ़ी, लेकिन मुनाफे की राह अब भी मुश्किल
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई सूची तैयार, जल्द मिल सकती है नेताओं को जिम्मेदारी
मौसम की मार: जम्मू-कश्मीर में 32 मौतें, कई इलाकों में भूस्खलन का खतरा
लापरवाही बनी काल, खुले सेप्टिक टैंक में गिरा 3 वर्षीय बच्चा, मौत से मातम