मंदिर की घंटियों से लेकर मन की शांति तक, सुबह-शाम करें बाबा खाटू श्याम की आरत
सुबह की हल्की धूप, मंदिर की घंटियों की गूंज और “हारे का सहारा खाटू श्याम हमारा” का जयघोष यह दृश्य किसी भी श्रद्धालु के मन को तुरंत सुकून से भर देता है. खाटू श्याम बाबा की आरती सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन का सहारा बन चुकी है. जो भी भक्त सच्चे मन से सुबह-शाम आरती करता है, उसके जीवन में एक अद्भुत शांति और भरोसा उतर आता है. यही वजह है कि कठिन परिस्थितियों में भी लोग श्याम बाबा का नाम लेकर आगे बढ़ते हैं. इस आरती के शब्दों में ऐसी सरलता और शक्ति है, जो सीधे दिल तक पहुंचती है और हर दर्द को हल्का कर देती है.
खाटू श्याम आरती का आध्यात्मिक महत्व
खाटू श्याम बाबा को कलियुग का देवता माना जाता है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी आरती करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. “ओम जय श्री श्याम हरे” से शुरू होने वाली यह आरती भक्तों के मन में भक्ति की गहराई को बढ़ाती है.
आरती के शब्दों में भगवान के रूप, उनकी भव्यता और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का सुंदर वर्णन मिलता है. जब कोई भक्त इसे गाता है, तो वह सिर्फ शब्द नहीं दोहराता, बल्कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करता है.
श्री खाटू श्याम जी की आरती
ओम जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे.
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे..
रतन जड़ित सिंहासन,सिर पर चंवर ढुरे.
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे.. गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे.
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे..
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे.
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे..
झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे.
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे..
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे.
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे..
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे.
कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे..
जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे.
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे..
ओम जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे.
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे..
ओम जय श्री श्याम हरे.. बाबा जय श्री श्याम हरे..

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