बायोडेटा में लिखें सास ससुर नहीं चाहिए: कोर्ट
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली की फैमिली कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा, यदि सास ससुर नहीं चाहिए थे। तो इस बात का उल्लेख बायौडेटा में करना चाहिए था।
अपर प्रधान न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने तलाक के मामले की सुनवाई करते हुए महिला टीचर पर तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा अगर किसी महिला को सिर्फ पति के साथ ही रहना है। उसे अपने साथ सास ससुर या किसी रिश्तेदार को नहीं रखना है। ऐसी स्थिति में शादी के लिए जो बायोडाटा तैयार किया जाता है।उसमें साफ-साफ लिखना चाहिए। उसे ऐसा पति चाहिए, जिसका कोई रिश्तेदार ना हो।
फैमिली कोर्ट ने कारोबारी सुभाशीष सिंह की तलाक याचिका को मंजूर करते हुए यह टिप्पणी की है। शुभाशीष ने 2019 में दीक्षा वर्मा से शादी की थी।शादी के बाद दीक्षा को सास ससुर के साथ रहना पसंद नहीं था। उसने एक अलग घर की मांग पति से की। पति द्वारा अलग घर नहीं देने के कारण वह पति से अलग रहने लगी। जिसकी परिणति तलाक के रूप में हुई।

आज का राशिफल अपडेट (15 अप्रैल 2026): प्रेम, करियर और धन से जुड़ी बड़ी भविष्यवाणी
डबरी बनी स्थायी आजीविका का आधार : जल संरक्षण के साथ बढ़ी आय
मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही
प्रधानमंत्री जनमन योजना से बदली दुनिया
राष्ट्रहित सर्वोपरि, सामाजिक समरसता के लिए एकजुट होकर करेंगे काम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
पंचायत सचिव के निलंबन के निर्देश : सीईओ ने विकास कार्यों का लिया जायजा
नवा रायपुर में जनसैलाब के बीच गरिमामय वातावरण में मनाई गई डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती
महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को मिलेंगी नई ऊंचाइयां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
संविधान निर्माता होने के साथ नए भारत के निर्माता भी हैं बाबा साहेब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
बाबा साहेब की जयंती पर विजयनगर को मिली विकास की सौगात