37 साल बाद फिर केंद्र की राजनीति में Nitish Kumar की चर्चा तेज
दिल्ली। जब राष्ट्रपति चुनाव के पहले नाम आया तो चुप्पी साधे रहे। जब उप राष्ट्रपति बनाने की बात आई तो तैयार नहीं हुए। अब राज्यसभा सांसद बनने को तैयार हो गए 20 साल बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार! यह चौंकाने वाला फैसला है, जिसकी जानकारी खुद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए दी। भारतीय जनता पार्टी के भारी दबाव के बाद वह 37 साल पुराने रास्ते पर लौटने को तैयार हुए हैं। तो क्या देश की नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें कोई बड़ा ओहदा मिलने जा रहा है या सिर्फ सांसद बनकर वह राजनीति की अंतिम पारी खेलने के लिए उतरे हैं?
उप प्रधानमंत्री जितनी ताकत तो रख रहे नीतीश
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार चंद्र बाबू नायडू और नीतीश कुमार के लोकसभा सांसदों की बदौलत टिकी है। इसमें नीतीश कुमार को जिस तरह से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ राज्यसभा जाना पड़ रहा है, उससे उनके लिए कुछ बड़ा प्लान रखना नरेंद्र मोदी सरकार के लिए शायद जरूरी हो। उप राष्ट्रपति पद की पेशकश नीतीश कुमार तक पहुंची थी, तब वह तैयार नहीं हुए थे। अब राज्यसभा सांसद बनकर रिटायर होना तो उनकी इच्छा में नहीं ही हो शायद। नीतीश ने अप्रत्याशित फैसला लिया है तो क्या आगे कुछ उन्हें आश्चर्यजनक तौर पर मिल सकता है? इस सवाल के जवाब में चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं- "वह सीएम की कुर्सी छोड़ने के लिए मान गए, यह बहुत चौंकाने वाला है। लेकिन, अगर अब उन्हें उप प्रधानमंत्री जैसा कुछ बनाया जाए तो बहुत आश्चर्यजनक नहीं होगा। वह अटल बिहार वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और केंद्र की मौजूदा सरकार के लगभग सभी मंत्रियों से सीनियर हैं। इसलिए, कुछ अच्छा तो होना ही चाहिए।"
पहली बार कब सांसद बने थे नीतीश, कब चुनाव हारे?
नीतीश कुमार पहली बार 28 नवंबर 1989 को पटना जिले के बाढ़ संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। तब, सांसद के रूप में उनका कार्यकाल 2 दिसंबर 1989 से 13 मार्च 1991 तक रहा था। इस बीच, अप्रैल 1990 में वीपी सिंह सरकार में उन्हें केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाया गया था। वह लोकसभा में उलटपुलट का दौर था। वीपी सिंह सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर सकी और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का कार्यकाल भी 10 नवंबर 1990 को खत्म हो गया। इसके बाद कांग्रेस की मदद से चंद्रशेखर पीएम बने, लेकिन 1991 में कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया तो फिर चंद्रशेखर पदमुक्त हो गए और 13 मार्च 1991 को लोकसभा भंग हो गया।
फिर 1991 में नीतीश कुमार बाढ़ से ही सांसद बने। तत्कालीन जनता दल महासचिव और लोकसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर रहे नीतीश कुमार को तब पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 8 अप्रैल 1993 को कृषि समिति का चेयरमैन बनाया था। लोकसभा का यह कार्यकाल पूरा हुआ तो 1996 में फिर बाढ़ से ही नीतीश कुमार सांसद बने। इस बार 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, हालांकि यह सरकार सात दिन ही चली। दूसरी बार, जब 15 मार्च 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो सबसे बड़े गठबंधन के 41 दलों में समता पार्टी भी थी।
नीतीश कुमार को केंद्रीय रेल एवं भूतल परिवहन मंत्री बनाया गया। अगस्त 1999 में गैसाल में हुई रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने मंत्रीपद से अपना इस्तीफा दे दिया। फिर करगिल युद्ध के बाद 1999 के लोकसभा चुनाव कराना पड़ा तो भाजपा बड़े दल के उभरी। पहली बार पांच साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार रही। इसमें भी नीतीश केंद्रीय मंत्री रहे। उसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार बाढ़ से हार गए और इसके बाद 2005 से बिहार की राजनीति बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आसपास ही रही। आज तक वही स्थिति है। दस बार मुख्यमंत्री बन चुके नीतीश कुमार अब 37 साल पुराने रास्ते पर दिल्ली कूच के लिए राज्यसभा जा रहे हैं।

समर्थकों और नेताओं की मौजूदगी में नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए दाखिल किया पर्चा
पुलिस लाइन में उत्साह और उमंग का माहौल, अधिकारियों ने कर्मचारियों को दी होली की शुभकामनाएं
महाराष्ट्र में ट्रक ऑपरेटरों का आंदोलन, किराया दरों और टैक्स पर विवाद
नीतीश कुमार का राजनीतिक इतिहास: छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री तक
एसबीआई का मेगा भर्ती अभियान, चेयरमैन बोले- हर साल 16000 नए कर्मचारियों को जोड़ने का लक्ष्य
फैशन स्टेटमेंट था या कोई धार्मिक वजह, क्यों विजय-रश्मिका के वेडिंग रिसेप्शन में नंगे पैर पहुंचे राम चरण?
37 साल बाद फिर केंद्र की राजनीति में Nitish Kumar की चर्चा तेज
इंदौर में रंगपंचमी पर हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना, संवेदनशील स्थानों पर विशेष सुरक्षा इंतजाम
रायपुर ग्रामीण में होली बनी खौफनाक, तीन हत्याएं, तिल्दा में चाकू से हमला