गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़: सरकार के 10,463 स्कूल बंद करने के फैसले पर चौतरफा विरोध
सरकार गरीब बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। जबकि शिक्षा का पहला स्तंभ प्राथमिक विद्यालय है। गरीब बच्चों पर सामाजिक और मानसिक प्रभाव पड़ेगा।जनपद अध्यक्ष गोपी बढाई ने कहा राज्य सरकार स्कूलों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। ऐसे में बस्तर संभाग में 1629 और प्रदेश में 10463 स्कूलों में ताला लग जाएगा। जनपद अध्यक्ष ने बताया कि स्कूल बंद होने से गरीब बच्चों को शिक्षा जारी रखने में काफी कठिनाई होगी। उनके पास घर पर शिक्षा प्राप्त करने के लिए जरूरी संसाधन नहीं होंगे और स्कूल जाने में भी सक्षम नहीं हो सकते।
मजबूरी में निजी स्कूलों में दाखिला कराना पड़ेगा जिससे गरीब बच्चों के परिवारों को आर्थिक कठिनाइयां भी होगी। स्कूल की फीस किताबें और अन्य खर्चों का भुगतान करने में परेशानी होगी। स्कूल बंद होने से गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो सकती है। गरीब बच्चों पर सामाजिक और मानसिक प्रभाव पड़ेगा।
गोपी बढाई ने कहा शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्रति 1 किलोमीटर में प्राथमिक विद्यालय खोला गया था। तीन शिक्षक का सेटअप वित्त विभाग से स्वीकृत है। यहां विद्यालय गांव, मजरा टोला, छोटी बस्ती, वंचित समाज सहित आदिवासी समाज गरीब लोगों के बच्चों के लिए संचालित था जिसे एक ही झटके में बंद कर हजारों गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से बेदखल कर दिया जा रहा है। जो 1 किलोमीटर से अधिक दूरी में जाने में सक्षम नहीं है और महंगी फीस देकर पढ़ नहीं सकता।
सरकार गरीब बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। जबकि शिक्षा का पहला स्तंभ प्राथमिक विद्यालय है। समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा को बढ़ावा देना, समानता और न्याय को स्थापित करना, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना और लोगों को जागरूक करना महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मांग की है कि प्रदेश के हर बच्चें को अच्छी शिक्षा मिले चाहे वह किसी भी वर्ग या जाति से हो। शिक्षा से लोगों में सोचने की क्षमता, समस्याओं को हल करने की दिशा और समानता की भावना विकसित होती है।
युक्तियुक्तकरण के नाम पर सरकारी स्कूलों को नहीं बल्कि निजी विद्यालयों को बंद किया जाना चाहिए। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी कर शिक्षा गुणवत्ता का प्रभावित करना युक्तियुक्तकरण के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद किया जाना एवं निजी विद्यालयों को बढ़ावा देना शिक्षा के निजीकरण का संकेत है। सरकारी स्कूल को बंद किया जाना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं है।
स्कूलों को बंद किए जाने पर शिक्षक ही नहीं बल्कि स्कूलों में विगत कई वर्षों से कार्यरत हजारों रसोईया, सफाई कर्मी एवं स्व सहायता समूह की महिलाओं के समक्ष जीवन यापन का संकट आ जाएगा। सरकार को यहां सुनिश्चित करना चाहिए की गरीब बच्चों को अपनी शिक्षा जारी रखने का अवसर मिले। गोपी बढ़ाई ने सरकार से मांग की है युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करें। राष्ट्रहित, समाज हित और शिक्षा हित में विद्यालयों को बंद ना किया जाए। उसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरण ना किया जाए।

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