बीजेपी नेता की दखलअंदाजी से सरकारी अमले के साथ टकराव, क्या है 'खजाने' का रहस्य?
जालौन जिले के उरई कोतवाली क्षेत्र स्थित माहिल तालाब के पास मंगलवार को उस वक्त हंगामे की स्थिति बन गई जब 5000 वर्ग फीट के एक विवादित प्लॉट में खुदाई के दौरान प्रशासन और बीजेपी नेताओं के बीच तीखी नोक-झोंक हो गई. प्लॉट में सफाई और खुदाई का काम किया जा रहा था. जिसे लेकर प्रशासन को यह सूचना मिली थी कि वहां जमीन के नीचे कोई मूल्यवान वस्तु यानी खजाना या ऐतिहासिक सिक्के दबे हो सकते हैं.
सूचना के आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा, उरई कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार राय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. प्रशासनिक टीम की मौजूदगी और जांच कार्रवाई से जमीन के मालिक अखंड प्रताप सिंह और कुछ बीजेपी नेताओं ने आपत्ति जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन बिना किसी वैध आदेश या नोटिस के निजी संपत्ति में हस्तक्षेप कर रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान किए जा रहे हैं.
पहले भी हो चुका है प्लॉट पर विवाद
बीजेपी नेताओं का कहना था कि प्लॉट को लेकर पूर्व में विवाद हुआ था और एक पक्ष विशेष की ओर से फर्जी शिकायतें कराई जा रही हैं. उनका यह भी आरोप था कि जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, उन पर कार्रवाई नहीं हो रही. जबकि खरीददार और शिकायतकर्ता को पुलिस व प्रशासन के जरिए प्रताड़ित किया जा रहा है.
विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट और बीजेपी नेताओं के बीच जमकर बहस हुई. दोनों पक्षों की तीखी नोक-झोंक के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें चेतावनी और आरोप-प्रत्यारोप की भाषा भी सुनाई दे रही है. इससे मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है.
मामले के बारे में उरई सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि उन्हें यह सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिली थी कि माहिल तालाब के पास स्थित एक प्लॉट में खुदाई के दौरान खजाना या कोई ऐतिहासिक धातु मिली है. इस सूचना के सत्यापन के लिए वह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे.
सच का पता लगाने गई थी सरकारी टीम
सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा ने कहा, ‘हमारी मंशा केवल यह जांच करने की थी कि कहीं कोई ऐतिहासिक महत्व की वस्तु या मूल्यवान सामग्री जमीन में दबे होने की बात सही तो नहीं है. जब हम पहुंचे तो देखा कि खुदाई का कार्य चल रहा है. हमने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की, लेकिन वे कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे थे. तभी कुछ लोग मौके पर पहुंचे और बिना किसी आधार के विरोध जताने लगे, जिससे बहस की स्थिति उत्पन्न हो गई.’
सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि ‘जो कार्रवाई की गई वह पूरी तरह से जानकारी के आधार पर प्रारंभिक जांच का हिस्सा थी. उन्होंने कहा कि ‘जमीन से जुड़ी कोई भी ऐतिहासिक वस्तु सरकार की संपत्ति होती है, इसलिए सूचना की गंभीरता को देखते हुए हमने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया.’
विवाद ने लिया राजनीतिक रंग
इस घटनाक्रम ने अब राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है. बीजेपी नेताओं ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. वहीं प्रशासन इस विवाद को एक सामान्य जांच प्रक्रिया करार दे रहा है.
घटना के दौरान हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है. वीडियो में दोनों पक्ष एक-दूसरे को चेतावनी देते और आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखें.

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