जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर
भोपाल|संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में केंद्र सरकार के रचनात्मक प्रयास को जिस प्रकार बाधित किया गया, उससे पूरे देश में उभरती नारी शक्ति में स्वाभाविक नाराजगी देखी जा रही है।यह केवल महिलाओं के सम्मान का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करने का गंभीर मामला भी है।लोकतंत्र की कार्यवाही को इस प्रकार बाधित करना भारतीय राजनीति में एक अपवाद जैसा है, जो अत्यंत चिंताजनक है।प्रतिपक्ष के दल चाहे कांग्रेस हो या अन्य क्षेत्रीय दल नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित न होने देने के लिए समान रूप से जिम्मेदार प्रतीत होते हैं।इस प्रकार की बाधाओं से राष्ट्र के विकास की गति प्रभावित होती है, जो कभी भी देशहित में नहीं हो सकता।मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में भी अवरोध उत्पन्न कर लोकतांत्रिक मूल्यों को आहत किया गया है।देश की नारी शक्ति इस तरह की स्थिति को लेकर सजग है। वह अपने सम्मान एवं अधिकारों के लिए मुखर होकर सामने आएगी।यह केवल महिलाओं की प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा देश इस विषय पर अपना स्पष्ट मत प्रकट करेगा।विधानसभा के विशेष सत्र को जिस उद्देश्य से बुलाया गया था, उसे बाधित करना लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।जिला पंचायत की आगामी सामान्य सभा में भी यह प्रयास रहेगा कि राज्य में पहले से लागू 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के संदर्भ में मातृशक्ति अपनी भावनाएं और अपेक्षाएं स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।नारी सशक्तिकरण आज देश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण और केंद्रीय विषय बन चुका है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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