हाईकमान का आदेश, एमपी कांग्रेस संगठन में होगा फेरबदल
नई दिल्ली। कांग्रेस संगठन के राष्ट्रीय स्तर से आए ताज़ा निर्देशों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की सियासत में खलबली मचा दी है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल द्वारा जिला कार्यकारिणी के गठन को लेकर जारी सख्त गाइडलाइन ने प्रदेश नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. वर्षों से गुटों के संतुलन और राजनीतिक समायोजन के लिए जम्बो जिला कार्यकारिणी बनाने की परंपरा पर अब राष्ट्रीय संगठन ने स्पष्ट रूप से रोक लगा दी है, जिससे पार्टी के भीतर असमंजस और तनाव की स्थिति बन गई है।
सीमित आकार में गठित होगी कार्यकारिणी
केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों की इकाइयों और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि अब जिलों की कार्यकारिणी सीमित आकार में ही गठित होगी. नई व्यवस्था के तहत बड़े जिलों में अधिकतम 55 और छोटे जिलों में केवल 35 सदस्यों की ही कार्यकारिणी बनाई जाएगी. इससे अधिक पदाधिकारी या सदस्य बनाए जाने पर पूरी कार्यकारिणी पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं. संगठन का तर्क है कि छोटी, चुस्त और जवाबदेह कार्यकारिणी से पार्टी की जमीनी मजबूती बढ़ेगी और संगठनात्मक अनुशासन कायम होगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में लिया गया फैसला
यह अहम निर्णय एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया. बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि सभी राज्यों में 15 दिन के भीतर जिला कार्यकारिणी का गठन नई गाइडलाइन के अनुसार पूरा किया जाए. इस समय-सीमा ने मध्यप्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि प्रदेश में पहले ही कई जिलों की कार्यकारिणियां घोषित या अंतिम चरण में हैं।
बड़े जिलों में बनाई बड़ी टीम
मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटीय संतुलन साधना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है. अलग-अलग खेमों को साधने के लिए बड़ी संख्या में पद बांटने की रणनीति अपनाई जाती रही है. इसी परंपरा के तहत 30 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की जिला कार्यकारिणी जारी की, लेकिन इनमें नई गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया. छिंदवाड़ा जिले में करीब 240 सदस्य बनाए गए, सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी नियुक्त हुए, जबकि छोटे जिले मऊगंज में भी 40 पदाधिकारी बना दिए गए।
भोपाल में भी केंद्र की गाइडलाइन बेअसर
भोपाल में भी स्थिति अलग नहीं है. भोपाल शहर जिला कांग्रेस की 106 सदस्यीय और भोपाल ग्रामीण की 85 सदस्यीय सूची पहले से तैयार बताई जा रही है. अब राष्ट्रीय स्तर से आए नए निर्देशों के बाद इन सूचियों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है. पार्टी के भीतर चर्चा है कि क्या पहले से घोषित कार्यकारिणियों को भंग कर नए सिरे से गठन होगा या फिर राष्ट्रीय नेतृत्व किसी तरह का अपवाद देगा. फिलहाल, संगठन के इस सख्त फैसले ने मध्यप्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई बेचैनी जरूर पैदा कर दी है।

सदन में पेपर लीक पर छिड़ सकती है बहस, सरकार-विपक्ष के बीच बनी सहमति
केजरीवाल बोले- पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में किया बड़ा सुधार, भाजपा पर साधा निशाना
'अब सिर्फ पीओके की बात होगी'— कारगिल वॉर मेमोरियल से राजनाथ सिंह का पाकिस्तान को कड़ा अल्टीमेटम
पर्यटकों को इतिहास के नाम पर ठगा, नकली रोमन थिएटर का राज 10 साल बाद खुला
विश्व कप में भारतीय शूटिंग टीम का शानदार प्रदर्शन, ईशा सिंह को स्वर्ण और मनु भाकर को कांस्य
विश्वकप और एशियाड मिशन के लिए सख्त अनुशासन, सविता ने बताई टीम की खास तैयारी
'स्ट्रीट फाइटर' वाले बयान से गरमाई राजनीति, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया जवाब
किसानों के लिए बड़ी राहत, मुख्यमंत्री ने 82 लाख से अधिक किसानों को भेजी ₹3300 करोड़ की सहायता राशि
यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता, इंडिगो फ्लाइट की राजकोट में कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग