बैठक के बीच सांसद का कड़ा एक्शन, अधिकारी को बाहर जाने के निर्देश
कोटा: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) राजस्थान इकाई की सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी का बेहद आक्रामक और सख्त तेवर देखने को मिला। अफीम उत्पादक किसानों के कथित उत्पीड़न और विभाग के भीतर जड़े जमा चुके भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए सांसद जोशी ने भरी सभा में एक विभागीय अधिकारी की जमकर क्लास लगाई और उसे तत्काल मीटिंग हॉल से बाहर जाने का आदेश दे दिया। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।
मंच से पूछा- 'क्या आपको यहाँ बैठने का हक है?' मांगा नार्को टेस्ट
बैठक की कार्यवाही के दौरान सांसद सीपी जोशी ने अचानक मंच से सुदीप लोहारू नामक अधिकारी का नाम पुकारा। जैसे ही अधिकारी अपनी सीट पर खड़ा हुआ, सांसद ने बेहद तल्ख लहजे में सवाल दागते हुए कहा, "क्या आपको इस गरिमामय बैठक में बैठने का कोई नैतिक अधिकार है?"
सांसद ने अधिकारी पर वित्तीय अनियमितता के बेहद गंभीर और सीधे आरोप लगाते हुए कहा:
"आपने फील्ड में जो कारनामा किया है, क्या आपको उसकी जानकारी है? पहले एक करोड़ चार लाख रुपये की अवैध वसूली करना और फिर मामला बिगड़ने पर 90 लाख रुपये वापस लौटा देना… क्या आपको ऐसा भ्रष्ट आचरण करते हुए जरा भी शर्म नहीं आई?"
सांसद ने इस भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए मंच से ही मांग कर दी कि इस अधिकारी की सच्चाई सामने लाने के लिए इसका बकायदा 'नार्को टेस्ट' कराया जाना चाहिए।
किसानों की आत्महत्या और फर्जी मुकदमों पर जताई गहरी चिंता
निर्दोष किसानों से की जा रही अवैध वसूली से बेहद खफा सांसद ने अधिकारी को बैठक की कार्यवाही में शामिल होने के अयोग्य घोषित कर दिया। उन्होंने कड़े लहजे में निर्देश दिए कि यह अधिकारी तुरंत हॉल से बाहर जाए, जिसके बाद वहां मौजूद पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में उक्त अधिकारी को बैठक से बेदखल कर दिया गया।
सांसद सीपी जोशी ने अफीम किसानों की जमीनी पीड़ा को उजागर करते हुए कहा कि नारकोटिक्स विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मियों के ऐसे ही घिनौने कारनामों की वजह से भोले-भाले किसानों को कर्ज के दलदल में फंसकर आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाना पड़ता है। किसान अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई और कर्ज लेकर इन अधिकारियों की जेबें भरता है, जो बेहद शर्मनाक है।
नीमच के फर्जीवाड़े का उदाहरण देकर उच्चाधिकारियों को घेरा
सांसद ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक विशिष्ट मामले का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया:
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साजिश: नीमच की एक विभागीय टीम ने एक सोची-समझी साजिश के तहत एक इलाके में जाकर एक किसान के खेत से करीब 3 किलोमीटर दूर जानबूझकर अवैध मादक पदार्थ (अफीम/डोडाचूरा) डाल दिया।
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फर्जी एफआईआर: इसके बाद उस निर्दोष किसान को तस्करी के झूठे जाल में फंसाते हुए उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर दी गई।
सांसद ने मंच पर मौजूद ब्यूरो के आला अधिकारियों से तीखा सवाल पूछा कि इस तरह का खुला फर्जीवाड़ा करने वाले दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ अब तक पुलिस केस दर्ज कर उन्हें सस्पेंड क्यों नहीं किया गया है?
तस्करी के खिलाफ, लेकिन अन्नदाता का शोषण मंजूर नहीं
सांसद सीपी जोशी ने अपना रुख पूरी तरह साफ करते हुए चेतावनी दी कि वे किसी भी प्रकार की अफीम तस्करी या अवैध डायवर्जन के पूरी तरह खिलाफ हैं और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन, इसकी आड़ में अगर विभाग के लोग ईमानदार और निर्दोष अफीम किसानों को डरा-धमकाकर उनका आर्थिक और मानसिक शोषण करेंगे, तो इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में नारकोटिक्स विभाग के कई राष्ट्रीय स्तर के अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस कप्तान मौजूद थे, जो सांसद के इस रौद्र रूप के सामने मूकदर्शक बने रहे। इस घटना के बाद चित्तौड़गढ़, नीमच और मन्दसौर के अफीम उत्पादक किसानों के बीच यह मजबूत संदेश गया है कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जनप्रतिनिधि बड़े से बड़े अधिकारी के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेंगे।

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