राजनीतिक घमासान: बागियों पर आदित्य ठाकरे का तीखा हमला
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने अपनी पार्टी के बागी सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। सोमवार (22 जून) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने बागी सांसदों पर विचारधारा के बजाय निजी लालच को प्राथमिकता देने और मतदाताओं के साथ गद्दारी करने का आरोप लगाया। आदित्य ठाकरे ने इन नेताओं को 'बिकाऊ' करार देते हुए कहा कि इन्होंने उन वोटरों के भरोसे का कत्ल किया है, जिन्होंने इन्हें महाविकास अघाड़ी (MVA) और 'इंडिया' गठबंधन के समर्थन से जिताया था।
आदित्य ठाकरे का आरोप— रातों-रात बेची वफादारी
आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर जनता के साथ विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि ये सभी नेता कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी के कार्यकर्ताओं की मेहनत और वोटों के दम पर संसद पहुंचे थे। जनता ने एनडीए (NDA) के उम्मीदवारों और उनकी नीतियों के खिलाफ जनादेश दिया था, लेकिन इन सांसदों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए वफादारी और प्रतिष्ठा को शर्मनाक तरीके से बेच दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव के वक्त यही नेता गठबंधन के बड़े नेताओं के सामने अपने क्षेत्रों में रैलियां करवाने के लिए हाथ जोड़ रहे थे और आज रातों-रात पाला बदलकर सत्ताधारी खेमे के पाले में जा खड़े हुए हैं।
शिवसेना (यूबीटी) का एक्शन: 24 घंटे का 'कारण बताओ नोटिस'
इस बड़े राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) अनिल देसाई ने दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक से नदारद रहने वाले सांसदों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर दिया है। सांसदों को सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है। सभी अनुपस्थित सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित में अपना स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम दिया गया है। पार्टी ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दी है, जिसके बाद संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा और शिंदे गुट में जाने की अटकलें
यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 3 सांसद (अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे) ही पहुंचे। जबकि संजय दीना पाटिल, नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, ओमप्रकाश राजेनिंबाल्कर और भाऊसाहेब वाकचौरे समेत 6 सांसद गायब रहे। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी साफ कर दिया है कि इन बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये सभी 6 सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर चुके हैं, जिसकी पुष्टि सत्ताधारी खेमे के कुछ नेताओं के बयानों से भी हो रही है।

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