खुद को छात्र बताकर ठग ने किया बड़ा फ्रॉड
जबलपुर: शहर के तिलवारा थाना क्षेत्र अंतर्गत अवनी विहार कॉलोनी में रहने वाली एक स्कूल शिक्षिका साइबर ठगी का शिकार हो गई हैं। एक शातिर जालसाज ने खुद को पुराना विद्यार्थी बताकर विश्वास जीता और फिर विदेश से कीमती उपहार भेजने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और उन खातों की जांच की जा रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।
इंस्टाग्राम पर पुराना छात्र बनकर बिछाया जाल
अवनी विहार कॉलोनी निवासी इकतीस वर्षीय श्रुति सेन, जो पेशे से शिक्षक हैं, उनके साथ ठगी की शुरुआत इंस्टाग्राम के जरिए हुई। रवि शर्मा नामक एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और दावा किया कि वह उनका पूर्व छात्र रहा है और वर्तमान में दिल्ली में एक अच्छी नौकरी कर रहा है। ठग ने उनके प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि वह उन्हें कुछ विशेष उपहार देना चाहता है जिसमें सोने और हीरे के आभूषण शामिल हैं। शिक्षिका द्वारा बार-बार मना करने के बावजूद आरोपी ने जिद की और बताया कि उसने लंदन से पार्सल भेज दिया है, जो जल्द ही उन तक पहुंच जाएगा।
लंदन टैक्स के नाम पर किस्तों में की वसूली
उपहार भेजने का दावा करने के बाद आरोपी ने नया पैंतरा चला और बताया कि पार्सल चूंकि विदेश से आ रहा है, इसलिए उस पर लगने वाला 'लंदन टैक्स' प्राप्तकर्ता को देना होगा। झांसे में आकर श्रुति ने पहली बार गूगल पे के माध्यम से भुगतान कर दिया, लेकिन ठग यहीं नहीं रुका। इसके बाद उसने कस्टम क्लीयरेंस और अन्य शुल्कों के नाम पर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। पंद्रह दिनों तक जब कोई पार्सल घर नहीं पहुंचा, तो शिक्षिका ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया, जहां आरोपी ने पार्सल की डिलीवरी से पहले और अधिक पैसों की मांग शुरू कर दी।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा और शुरू की जांच
जब शिक्षिका को अहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, तब तक उनके भारतीय स्टेट बैंक के खाते से कुल चार लाख चार हजार पांच सौ रुपये निकल चुके थे। ठगी का शिकार होने के बाद उन्होंने तुरंत पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। तिलवारा थाना पुलिस ने आरोपी रवि शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का रिकॉर्ड खंगाल रही है जिनका उपयोग इस ऑनलाइन फ्रॉड को अंजाम देने के लिए किया गया था ताकि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचा जा सके।

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