लद्दाख मुद्दों पर अनिश्चितता, गृह मंत्रालय की बैठक को लेकर इंतजार
जम्मू/लेह | केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों और भविष्य को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल गहराने लगे हैं। गृह मंत्रालय की हाई पावर कमेटी (HPC) की बैठक बुलाने में हो रही देरी से लेह और कारगिल के संगठनों में भारी आक्रोश है। करीब एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी दिल्ली से बुलावा न आने पर अब लद्दाख के नेताओं ने अपनी रणनीति बदलते हुए सीधे संसद का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।
संसद में घेराबंदी: विपक्षी सांसदों से मांगा समर्थन
गृह मंत्रालय की सुस्ती को देखते हुए कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) और लेह अपेक्स बॉडी (LAB) ने अब राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है।
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प्रमुख मुलाकातें: केडीए के पदाधिकारी सज्जाद कारगिली ने हाल ही में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह महदी से मुलाकात की।
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मकसद: लद्दाख के संगठनों का आग्रह है कि 'राज्य का दर्जा' और 'छठी अनुसूची' जैसे गंभीर मुद्दों को संसद के आगामी सत्र में मजबूती से उठाया जाए। इससे पहले कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने भी लद्दाख का दौरा कर स्थानीय मांगों को अपना समर्थन दिया था।
22 अक्टूबर की बैठक के बाद 'सन्नाटा'
गौरतलब है कि 5 महीने के लंबे अंतराल के बाद पिछले साल 22 अक्टूबर को दिल्ली में हाई पावर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।
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सकारात्मक शुरुआत: उस बैठक में छठी अनुसूची, राज्य का दर्जा, नौकरियों में आरक्षण और भूमि अधिकारों पर बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी थी।
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प्रस्ताव का इंतजार: गृह मंत्रालय के निर्देश पर नवंबर में लद्दाख के संगठनों ने अपनी मांगों का एक विस्तृत लिखित प्रस्ताव भी भेज दिया था।
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बढ़ता संदेह: संगठनों का कहना है कि प्रस्ताव भेजने के बाद अब तक बैठक की अगली तारीख तय न होना सरकार की नीयत पर शक पैदा करता है।
नेताओं के तीखे तेवर: "देरी से भड़क सकता है आंदोलन"
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सज्जाद कारगिली (KDA): "दिल्ली में बैठक बुलाने में हो रही देरी किसी भी नजरिए से सही नहीं है। जब सरकार संवाद का रास्ता रोकती है, तभी सड़कों पर प्रदर्शन की स्थिति बनती है।"
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छेरिंग दोरते (LAB): "हमने अपना पक्ष और प्रस्ताव स्पष्ट रूप से गृह मंत्रालय को भेज दिया है। अब देरी क्यों हो रही है, इसका जवाब मंत्रालय को देना चाहिए।"
लद्दाख की मुख्य मांगें जिन पर अड़ा है गतिरोध:
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राज्य का दर्जा: लद्दाख को पूर्ण राज्य घोषित करना।
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छठी अनुसूची: जनजातीय संस्कृति और जमीन की सुरक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा कवच।
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लोकसभा सीटें: लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग संसदीय सीटें।
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रोजगार: लद्दाख के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में विशेष आरक्षण और पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) का गठन।

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